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kapil shukla


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भारत पाक संस्कृति एक

Posted On: 20 Aug, 2011  
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चोर लोग बता रहे हैं नियम कानून

Posted On: 17 Aug, 2011  
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क्या हम वाकई आजाद हैं

Posted On: 16 Aug, 2011  
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मैच तो देश का है हमसे क्या

Posted On: 11 Aug, 2011  
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अड्डेबाजों में भी बदलता कल्चर

Posted On: 11 Aug, 2011  
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देश चल कैसे रहा है

Posted On: 6 Aug, 2011  
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विस्फोट या भटकाव

Posted On: 20 Jul, 2011  
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गुलामी की ओर बढ़ता देश

Posted On: 20 Jul, 2011  
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सफर किसके भरोसे करें

Posted On: 12 Jul, 2011  
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और राहुल की शुरु पद यात्राएं

Posted On: 6 Jul, 2011  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा:

आई अब जनता की बारी* अकड़ निकल गई उनकी सारी। ऐसे विनम्र हो गए हैं वे, जैसे पकड़ी गई हो चोरी। माँगों पाँच वर्ष का हिसाब। देना होगा उनको जवाब जीतकर हो गए थे गुम, अब सामने आए हैं जनाब।। आया है मौका अब आपका। काम देखो प्रत्याशियों का। विवेक की तुला पर तोलो, असली चेहरा जानो इनका।। सोच-समझकर बटना दबाना। गलती हुई तो पड़ेगा पछताना। न आना तुम बहकावे में, जो योग्य हो उसी को चुनना।। चिकनी-चुपड़ी बातों पर कीजिए मत विश्*वास। अपने हित को साधने ये बहुत जगाएँगे आस। हम हैं जनता, ये हैं सेवक, हम नहीं हैं इनके दास। अपने सेवक को चुनने का है अधिकार हमारे पास।। व्यर्थ न जाए आपका ये बेशकीमती वोट। जहाँ चाहते आप हैं वहीं लगाना चोट।। मकसद हो जाए पूरा लक्ष्य भी हो हासिल। सोच-विचार कर दीजिए अपना बहुमूल्य वोट।।

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