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गुलामी की ओर बढ़ता देश

Posted On: 20 Jul, 2011 Others में

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देश फिर से नेताओं के सहारे चलता रहा तो हमारा देश दोबारा गुलामी की जंजीरों में जकड़ सकता है। क्योंकि हम अपने देश की अंदर की समस्याओं को तो सही कर ही नहीं पा रहे हैं और बड़े बड़े नेताओं के भाषण यह हैं कि आतंकवाद हमले तो हम रोक नहीं सकते। लेकिन यह आतंकवाद का दंश हमारे देश को खोखला कर रहा है उसके बावजूद दूसरे पड़ोसी राज्य आपस में दोस्ती कर रहे हैं तो यह कोई बड़ी बात नहीं है क्योंकि तालिबान अफगानिस्त से मिल रहा है और अफगानिस्तान पाकिस्तान से पाकिस्तान चीन से दोस्ती कर रहा है अगर यह देश मिल गए और उन्होंने मिलकर भारत पर आक्रमण किया तो हमारा देश फिर से इन देशों की गिरफ्त में आ जाएगा और हमारे देश के वरिष्ठ नेता कहते ही रहेंगे कि हम यह रोक नहीं सकते थे और हम फिर से गुलाम हो गए।

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

subhashmittal के द्वारा
July 21, 2011

इस तरह की बयानबाजी ये करते ही इसलिये है की कल को अगर हम गुलाम हो गए तो इनकी सत्ता tab भी बची रहे ,jaisa अंग्रेजों के जाने के बाद हुआ था | देश का दुर्भाग्य है की देश का शाशन आउट्सोर्सिंग se संचालित हो रहा है ,इस खेल में कुछ बड़े मीडिया के लोग भी शामिल लगते हैं|

vivekgoel के द्वारा
July 21, 2011

नेता जा रहे होटल ताज!!!! हे भगवान् कब तुम धरती पर पधारोगे इन सत्ता के मारों को कब मुक्ति दिलाओगे सत्ता के मद में खोये हैं ये बन्दे,हो गए हैं अंधे सारे घुस ,चोरी और लुट से हैं इनके बसेरो में उजियारे बच्चे भूके हैं,मगर हैं नहीं इनको होश होती है नफ्रात खुदसे जब देखता हूँ विदेशी धन कोष भारत का है धन वहां सड रहा मगर बच्चो के तन पर कपडा नहीं यहाँ माएं पानी को हैं मोहताज, BPL कार्ड नहीं है आज इन परेशानियों का शबाब कब समझेंगे ये सरताज लगता है कभी कभी अन्धो का है यह राज बच्चे भूक से बिलख रहे,और नेता जा रहे होटल ताज!!!!

vivekgoel के द्वारा
July 21, 2011

आई अब जनता की बारी* अकड़ निकल गई उनकी सारी। ऐसे विनम्र हो गए हैं वे, जैसे पकड़ी गई हो चोरी। माँगों पाँच वर्ष का हिसाब। देना होगा उनको जवाब जीतकर हो गए थे गुम, अब सामने आए हैं जनाब।। आया है मौका अब आपका। काम देखो प्रत्याशियों का। विवेक की तुला पर तोलो, असली चेहरा जानो इनका।। सोच-समझकर बटना दबाना। गलती हुई तो पड़ेगा पछताना। न आना तुम बहकावे में, जो योग्य हो उसी को चुनना।। चिकनी-चुपड़ी बातों पर कीजिए मत विश्*वास। अपने हित को साधने ये बहुत जगाएँगे आस। हम हैं जनता, ये हैं सेवक, हम नहीं हैं इनके दास। अपने सेवक को चुनने का है अधिकार हमारे पास।। व्यर्थ न जाए आपका ये बेशकीमती वोट। जहाँ चाहते आप हैं वहीं लगाना चोट।। मकसद हो जाए पूरा लक्ष्य भी हो हासिल। सोच-विचार कर दीजिए अपना बहुमूल्य वोट।।


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